भूखों का पेट भरने के साथ व्यक्ति को स्वावलम्बी बनाना भी सेवा भारती का उद्देश्य – पराग अभ्यंकर जी
काशी। भूखों का पेट भरने के साथ व्यक्ति को स्वावलम्बी बनाना भी सेवा भारती का उद्देश्य है। वर्तमान में जो व्यक्ति हाथ फैलाकर खड़ा है वह कल अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिए। इसके साथ ही वह व्यक्ति समाज के अन्य वंचित वर्ग को भी स्वावलंबी बना सके, सेवा भारती के स्वावलंबन आयाम का यही उद्देश्य है। उक्त विचार बाबतपुर रोड स्थित कोइराजपुर के संत अतुलानंद कांवेंट स्कूल में आयोजित राष्ट्रीय सेवा भारती के स्वावलंबन एवं वैभव श्री प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सेवा प्रमुख पराग अभ्यंकर जी ने व्यक्त किया।
उपस्थित प्रशिक्षुओं को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रतिज्ञा में लिखा है कि अपने पवित्र हिंदू समाज का संरक्षण कर, उसकी सर्वांगीण उन्नति करना कार्यकर्ताओं का लक्ष्य है। इसके लिए आवश्यक है कि समाज के विभिन्न अंगों में जो अंतर है उसे दूर करें। जीवन रक्षण एवं समग्र विकास के लिए व्यक्ति का स्वावलंबी होना आवश्यक है। कमजोर वर्ग की इसी आवश्यकता को समझकर सेवा कार्यों में स्वावलंबन एवं वैभव श्री आयाम प्रारंभ हुआ। संपूर्ण भारत में 980 सेवा संस्थाओं के माध्यम से वनवासी, पर्वतीय क्षेत्र में रहने वाले लोग घुमंतू एवं दिव्यांग बंधुओं के बीच अनेक सेवा कार्य चल रहे हैं। जिनका मातृ संगठन सेवा भारती है। सेवा भारती में माताओं के योगदान की चर्चा करते हुए पराग जी ने कहा कि माताओं में सेवा भाव के साथ कुशल प्रबंधन का भी गुण रहता है। इस कारण माताएं सेवा कार्य अधिक अच्छा कर सकती हैं। समाज में सेवा की आवश्यकता पर बल देते हुए वक्ता ने कहा कि भारतीयों में सेवा का भाव हृदय में स्वतः उपजता है। दूसरों की सेवा करके स्वयं को धन्य अनुभव करना यह हमारी परंपरा में है। व्यक्ति को भोजन कराना यह तात्कालिक सेवा है। स्थाई सेवा के लिए उसको स्वाबलंबी बनाना आवश्यक है। परम वैभव पर जाने के लिए सभी को उन्नति और विकास का समान अवसर मिलना चाहिए। प्रारंभिक वर्षों में सेवा भारती का चिंतन शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर था। वर्तमान में 35000 बाल संस्कार केंद्र एवं कोचिंग सेंटर शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, परंतु व्यक्ति का अपने एवं अपने परिवार का भरण पोषण भी आवश्यक है। अतः उसकी आजीविका में भी सहयोग किया जाना सेवा भारती का लक्ष्य है। स्वावलंबन का एक लाभ यह भी है कि अब गांव से पलायन कम हो गया है। प्रशिक्षण वर्ग की अध्यक्षता करते हुए सेवा भारती काशी प्रांत के प्रांत अध्यक्ष राहुल सिंह ने कहा कि यह स्वावलंबन एवं प्रशिक्षण वर्ग समाज के अंतिम व्यक्ति तक को लाभान्वित करेगा एवं अपने इस गुण का उपयोग समाज के हित में करे। कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए अखिल भारतीय स्वावलम्बन प्रमुख विनोद बिड़ला जी ने कहा कि इस प्रशिक्षण वर्ग में ई मार्केटिंग, रोजगार सृजन हेतु विभिन्न विषय समूह परिचर्चा एवं अनुभव कथन के कुल 10 सत्र रहेंगे। इस प्रशिक्षण वर्ग में भारत के 37 प्रांतों से दो सौ से अधिक संख्या में प्रशिक्षु भाग ले रहे है। कार्यक्रम में वैभव श्री की अखिल भारतीय संयोजिका चन्द्रिका ताई चौहान भी मंचासीन रहीं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन किया गया। एकल गीत प्रतिभा ने प्रस्तुत किया गया। उदघाटन सत्र में संघ के अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख सैंथिल कुमार जी, सेवा भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री सुधीर कुमार जी, संयुक्त महामंत्री विजय पुराणिक जी, वैभव श्री के राष्ट्रीय संयोजक पद्म कुमार जी, पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र सेवा प्रमुख युद्धवीर जी, काशी प्रांत के सह प्रांत कार्यवाह प्रो.राकेश जी, प्रांत प्रचारक रमेश जी सहित बड़ी संख्या में प्रशिक्षु एवं मातृशक्ति उपस्थित रहे। संचालन पद्मा कुबेर ने किया।
स्वावलंबी पुरुषों एवं महिलाओं ने लगायी हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी
प्रशिक्षण वर्ग में भारत भर से आए स्वावलंबन एवं वैभव श्री आयाम से लाभान्वित महिला एवं पुरुषों ने हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई। जिसमें पत्थर से बने थ्री कट आर्ट (जीआई उत्पाद), देशी गाय के गोबर से बने विभिन्न उत्पाद, घरेलू सजावट की वस्तुएं, अचार, मुरब्बा, हथकरघे से निर्मित वस्त्र, राखी, मोमबत्ती, धूप, जूट एवं कपड़ों से निर्मित झोले इत्यादि का स्टाल लगाया गया था।
वर्ग का गरिमापूर्ण समापन
दो दिवसीय (3,4 अक्टूबर) अखिल भारतीय वर्ग का समापन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख श्री सैंथिल कुमार जी के मार्गदर्शन एवं प्रेरणादायी उद्बोधन के साथ हुआ। यह वर्ग कुल आठ सत्रों में संपन्न हुआ, जिसमें सेवा, स्वावलंबन और समाज के सर्वांगीण विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
वर्ग के दौरान सेवा का उद्देश्य, स्वावलंबन की संकल्पना एवं उसकी संभावनाएं, वैभव स्वयं सहायता समूह, सोशल मीडिया, मार्केटिंग तथा सफलता की प्रेरक कहानियों सहित अनेक विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों को सेवा कार्यों को प्रभावी एवं परिणामदायी बनाने के साथ-साथ स्वावलंबन के नए अवसरों और आधुनिक माध्यमों के उपयोग की दिशा में भी मार्गदर्शन दिया गया।
राष्ट्रीय सेवा भारती देशभर में सेवा कार्यों के माध्यम से समाज के वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने का सतत प्रयास कर रही है। रोजगार एवं स्वावलंबन की संभावनाओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ संस्कार निर्माण, सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र प्रथम की भावना को समाज में सुदृढ़ करना इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
सेवा भारती का मूल उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान, स्वावलंबन और आत्मविश्वास के साथ अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए सक्षम बनाना है। सेवा के माध्यम से समाज में परस्पर सहयोग, अपनत्व और राष्ट्रहित की भावना को जागृत करते हुए एक सशक्त, समरस एवं आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।


